vashikaran tilak

तिलक से वशीकरण का अनुभूत प्रयोग

प्रिय साधक टिका  वशीकरण, तिलक वशीकरण, सम्मोहन तिलक एक ही प्रकार के विभिन रूप है जिसके द्वारा कोई भी किसी को भी अपने वस में कर सकता है | इसके लिए सबसे पहले वशीकरण बनाया जाता है या आप किसी साधु से भी इसको प्राप्त कर सकते है और या आप हमसे इसकी प्रयोग विधि जन सकते है | यदि आपको वशीकरण टिका बना हुआ कही से मिल जाता है तो केवल आपको मस्तिक में लगाना होता है और आप जिस किसी के शामे जाते है वो आपसे प्रसन होकर आपकी सारी बातो में हा करता है आप जैसा चाहते हो वो इंसान वैसा ही करता है | लेकिन एक सिद्ध वशीकरण तिलक पाना बहुत ही मुश्किल काम है | लेकिन इसकी फ़िक्र करने की कोई जरुरत नहीं है आप इसको अपने घर पर भी बना सकते उसके लिए कुछ विधि से इसको बनाना पड़ता है|

तिलक से वशीकरण कैसे होता है, कैसे बनाये और उसका प्रयोग कैसे करे


वशीकरण तिलक को बनाने के लिए थोड़ा सुद्ध सिंदूर लेवे , थोड़ा सुद्ध केसर लेवे , थोड़ा सुद्ध गोराचन लेवे उसको अछे से मिला लेवे एंड इसको एक चांदी की डीबी में रखे | हमेशा सुबह ही इस तिलक का प्रयोग करना चाइये | तिलक हमेशा मध्य ललाट में लगाना चाइये एंड तिलक लगते समय निम्न मंत्र का उचारण करना चाइये |

मंत्र : ॐ नमो सर्व लोक: वशंकराय: कुरऊ कुरऊ स्वा:

इसके बाद देखे जो आपके सामने देखेगा वो आपसे वशीभूत हो जायेगा और आपको बहुत सफलता मिलेगी | यदि प्रबल वशीकरण तिलक चाहते हो तो हमसे संपर्क करे क्योंकि बहुत से विभिन मंत्र के उचारण के बाद वो तिलक तैयार होता है जिससे तो हर कार्य आपका सफल होगा |

यदि आप वशीकरण तिलक बनाने की विधि का अनुभूत प्रयोग घर पर ही करना चाहते है तो एक सिंदूर की डीबी ले उसमे से थोड़ा सिंदूर एक छोटी कटोरी में निकाल ले फिर चमेली का तेल ले उसको उसमे में मिलये और ये तिलक तो बन गया पर वशीकरण का काम नहीं करेगा क्योंकि इसको पहले सिद्ध करना पड़ेगा इसके लिए आप मेरे से संपर्क कर सकते है की कोनसा सक्तिशाली मंत्र का उच्चारण करना पड़ेगा जिससे आपकी वशीकरण तिलक की उपयोगिता पूरी होगी|

वशीकरण तिलक/सम्मोहन तिलक को सिद्ध करने के लिए बहुत से प्रकार मंत्र और सबको सिद्ध करने की अलग विधि विधान है जैसे की आप अपने ऑफिस में बॉस को खुश रखना चाहते है इसके लिए अलग से वशीकरण मंत्र का उच्चारण किया जायेगा, यदि आप किसी लड़की से प्रेम करते है और उसको अपने वश में करना चाहते है तो आपको अलग विधि और मंत्र का प्रयोग करना पड़ेगा| तो मै ये बताना चाहता हु की वशीकरण तिलक को किस के लिए आप प्रयोग मै लेना चाहते है सब कार्य के लिए अलग अलग विधि विधान मौजूद है |

 

बहुत से समय मै वशीकरण तिलक का अनुभूत प्रयोग जॉब्स मै, ऑफिस मै , बिज़नेस मै , प्यार मै, परिवार में, किसी को अपने वश में करने के लिए, और भी बहुत से प्रकार से आप इसका प्रयोग कर सकते है | इसके अनुसार ही वशीकरण तिलक / सम्मोहन तिलक / वशीकरण टिका को बनाया जाता क्योंकि इसमें आपके प्रयोग के तरीके अलग अलग है |

वशीकरण का शाब्दिक अर्थ है वशीभूत होना, अर्थात व्यक्ति के मन, चित्त व शरीर को मंत्रो तथा तांत्रिक क्रियाओ के माध्यम से वशीभूत करना |

 

पौराणिक काल से लोगो को हित कार्यो हेतु हमारे साधु संत व तांत्रिक इन क्रियाओं का प्रयोग किया करते थे, जिससे व्यक्ति उनके वंश में हो जाता था और कोई अनर्थ कार्य होने से बच जाता था |

 

यह क्रिया आज भी मौजूद है, इसे करने की अलग अलग प्रयोग विधि तथा उपाय है | इन्ही उपायों में से एक उपाय वशीकरण तिलक है | इस तिलक में अलौकिक शक्तिया होती है, जो भी व्यक्ति इस तिलक का प्रयोग करता है सामने वाला व्यक्ति उससे आकर्षित होने लगता है | अर्थात उसके मन व शरीर आपके प्रति आकर्षित होने लगते है |

 

वशीकरण तिलक को तांत्रिक मंत्रो द्वारा अभिमंत्रित किया जाता है |

 

वशीकरण तिलक प्रयोग विधि :

 

सर्वप्रथम स्नान ध्यान करके सुबह के समय वशीकरण तिलक को गंगा जल, चन्दन पाउडर के साथ मिश्रित करके दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए तिलक करे |

 

वशीकरण तिलक करने का मंत्र :

 

|| " ॐ नमः कामाक्षी देवी (नारी व पुरुष का नाम ) सिद्ध कुरु कुरु स्वाहा "||

 

इस मंत्र का प्रयोग नित्य २१ दिन करने से आपके कार्य सिद्ध हो जाते है |

वशीकरण तिलक मंत्र


वशीकरण तिलक- मनुष्य २१वीं सदी में पदार्पण कर चूका है. कई आकाशगंगाओं की खोज कर चुका है. इतनी प्रगति के बावजूद मनुष्य को अब भी यह विश्वास है की मंत्र सिद्धि के माध्यम से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है. आम भाषा में इसी को वशीकरण कहते हैं . वशीकरण से अभिप्राय है -“किसी को अपने वश में करना “. वशीकरण का प्रयोग कई तरह से किया जा सकता है. इसके द्वारा मनुष्य अपने दुश्मन को भी अपना मित्र बना सकता है, मनचाहा वर प्राप्त किया जा सकता है, अपने करियर में आ रही बाधाओं को दूर कर सकता है.

ये तो हुआ वशीकरण का अर्थ. अब जानते हैं की तिलक क्या होता है? तिलक अर्थात टीका, जिसे हम अपने माथे पर भौंहों के बीच में लगते हैं. भारत योग की नगरी है. आदिकाल से हमारे यहाँ योग का, कुंडलिनी क्रिया का महत्त्व रहा है. योग विद्या के अनुसार यह मन जाता है की दोनों भौंहों के बीच में आज्ञाचक्र पर तिलक करने से न सिर्फ ललाट की आभा बढ़ती है, बल्कि इससे मन मस्तिष्क में एक स्फूर्ति का संचरण भी होता है.
वशीकरण तिलक मंत्र

वशीकरण तिलक शब्द वशीकरण+तिलक से मिलकर बना है. अर्थात मन्त्रों द्वारा सिद्ध की गई विशेष सामग्री का तिलक के रूप में प्रयोग करके किसी को वश में करना या फिर अपन आकर्षण शक्ति को बढ़ाना. अब सवाल यह उठता है की मनुष्य इस वशीकरण तिलक को आखिर क्यों प्रयोग करता है? इसके कई कारन हो सकते हैं, जैसे- किसी विशेष व्यक्ति को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए, किसी पार्टी में सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ताकि वह पार्टी में सबके आकर्षण का केंद्र बन सके. इसके माध्यम से किसी विशेष स्त्री या उरुष को मोहित भी किया जा सकता है. कुछ लोग इस वशीकरण तिलक का प्रयोग अपने रूठे मित्र को मनाने के लिए भी करते हैं. वशीकरण तिलक का इस्तेमाल संपर्क में आने वाले व्यक्तियों पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए भी किया जाता है.

वशीकरण में कई तरह की सामग्री प्रयोग में लाई जाती है. उदाहरणार्थ :

१. शुद्ध सिन्दूर

२. शुद्ध केसर

३. शुद्ध गोरोचन

इन सबको बराबर भाग में मिलाकर एक चांदी की डिब्बी में रख लिया जाता है. फिर सूर्यौदय के पश्चात इस डिब्बी में से तिलक लगाना चाहिए. तिलक लगाने की सही जगह है, “दोनों भौंहों के बीच -‘आज्ञाचक्र’ “. तिलक लगाते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना चाहिए :

” ॐ नमः सर्व लाक वशंकराय कुरु कुरु स्वाहा ”

इस मन्त्र के प्रयोग से सबको अपनी ओर आकर्षित किया जा सकता है.

वशीकरण के अन्तर्गत प्रियजन को मनाने के लिए निम्नलिखित विधि अपनायी जाती है:- ” सर्वप्रथम सुबह स्नान ध्यान करके सुबह के समय वशीकरण तिलक की सामग्री को गंगाजल, चन्दन पाउडर के साथ मिश्रित करके निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए तिलक करें। इससे आपका रूठा हुआ मित्र मान जायेगा और आपके पास आ जायेगा। मन्त्र है :

“ॐ नमः कामाक्षी देवी ( नारी व पुरुष का नाम ) सिद्ध कुरु कुरु स्वाहा ”

इस मन्त्र का २१ दिन तक रोज़ जाप करना है।

हर स्त्री सोचती है की उसका पति उसके वश में रहे. उसकी हर बात माने. ज्योतिषशास्त्र में पति को वश में करने के लिए वशीकरण तिलक मंत्र है. “रविवार के दिन रात को सोते समय कुछ सिन्दूर बिस्तर पर पति के सोने वाले हिस्से की ओर बिखरा दें तथा सुबह नाहा कर माँ पार्वती का नाम लेकर उससे अपनी मांग में भर लें.” इससे पति सदैव वश में रहते हैं.

 

असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से ८ किलोमीटर दूर कामाख्या से भी १० किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है ” कामरूप कामाख्या मंदिर” . यह मंदिर शक्ति की देवी सती का मंदिर है. इसका तांत्रिक महत्त्व है. यहां पर एक

मोहन मंत्र प्रचलित है. माना जाता है की , कामरूप कामाख्या क्षेत्र में ‘कामिया सिन्दूर’ पाया जाता है. इसे प्राप्त कर लगातार सात रविवार तक निम्नलिखित मन्त्र का १०८ बार जाप करें. इससे मन्त्र सिद्ध हो जायेगा. प्रयोग के समय ‘कामिया सिन्दूर’ पर सात बार निम्नलिखित मन्त्र पढ़कर अपने माथे पर टीका लगाएं. इस तिलक को लगाकर जहाँ भी जाएंगे सभी वश में हो जायेंगे.

मन्त्र है:

“हथेली में हनुमन्त बसै, भैरु बसे कपार।

नरसिंह की मोहिनी, मोहे सब संसार।

मोहन रे मोहन्ता वीर, सब वीरन में तेरा सीर।

सबकी नजर बाँध दे, तेल सिन्दूर चढ़ाऊँ तुझे।

तेल सिन्दूर कहाँ से आया, कैलास पर्वत से आया।

कौन लाया, अन्जनी का हनुमन्त, गौरी का गनेश लाया।

काला, गोरा, तोतला तीनों बसे कपार।

बिन्दा तेल सिन्दूर का, दुश्मन गया पाताल।

दुहाई कमिया सिन्दूर की, हमें देख शीतल हो जाए।

सत्य नाम, आदेश गुरु की। सत् गुsरु, सत् कबीर। ”

वशीकरण तिलक मन्त्र नकारात्मक भी हैं और सकारात्मक भी. इसका सकारात्मकता पूर्ण प्रयोग व्यक्ति को प्रगति, मनचाहे वर की प्राप्ति, समाज में प्रतिष्ठित स्थान दिला सकता है. इससे दूसरों की भलाई भी की जा सकती है.

परंतु यदि व्यक्ति नकारात्मक प्रवृति वाला हो तो वह सिर्फ अपना ही भला सोचता है. उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की उसके इस मन्त्र तंत्र के प्रयोग का किसी दुसरे पर दुष्प्रभाव भी पद सकता है . और वह इस वशीकरण तिलक मन्त्र का काली विद्या के रूप में प्रयोग करता है, जिसका न सिर्फ दूसरों पर बल्कि स्वयं उस व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

अंततः हम यही कहना चाहते हैं की वशीकरण तिलक मन्त्र जैसी शक्तियों का प्रयोग यदि कोई व्यक्ति करना भी चाहता है तो ‘सर्वजन हिताय’ अर्थात सबके हित की भावना को ध्यान में रख कर करें. इसका दुरूपयोग ना करें.

वशीकरण तिलक


जैसा की वशीकरण तिलक से तो परिचित होंगे इसका अनुभूत प्रयोग किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए होता है | हिंदू परंपरा में ललाट पर तिलक लगाने के कई तरीके बताए गए हैं, तो इसे सुख-शांति देने, गौरव, आत्मविश्वास, आत्मबल व मान-सम्मान बढ़ाने तथा मन को एकाग्र करने के अतिरिक्त वशीरकण या सम्मोहन का अचूक प्रभाव देने वाल भी बताया गया है। आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के सहारे जीवन को सहज-सरल बनाया जा रहा है। इसके साथ ही अत्यंत प्राचीनकाल से चली आ रही हल्दी, रोली, चंदन, सिंदूर, केशर, भस्म आदि से तिलक लगाने की परंपरा के पीछे की छिपी भावनात्मक महत्व को समझने की जरूरत है।

स्त्री-पुरुष सभी के द्वारा लगाया जाने वाला तिलक मनोवैज्ञानिक प्रभाव और वैज्ञानिक आधार समेटे हुए है। इसमें धार्मिक कार्य की उपयोगिता और महत्ता के निहित है। इसमें विजयोत्सव के भाव हैं।  शुभकामनाओं और शुभ संकेतों का प्रतीक है। इसमें सामने वाले को सम्मोहित करने की अद्भुत क्षमता है। तिलक लगाने वाला व्यक्ति सात्विक भावना से भरा रहता है, जिसपर देवी-देवताओं की विशिष्ट कृपा बनी रहती है। विभिन्न पर्व-त्यौहारों, धार्मिक तीर्थस्थलों, विशिष्ट आतिथि सत्कार, धार्मिक अनुष्ठानों, शुभ-संस्कारों और पूजा-पाठ के कार्य इसके बगैर संपन्न नहीं होते हैं। इसके प्रभाव में आया हुआ व्यक्ति आध्यात्मिकता और आत्मीयता की ओर अग्रसारित हो जाता है। एक तरह से यह तीसरे नेत्र के प्रतीक के रूप में बेहद चमत्कारी प्रभाव वाला है।

किसी व्यक्ति को सम्मोहित करने के अनेक उपायों में तिलक से वशीकरण करने के विविध तरीके बताए गए हैं। ऐसी मान्यता है कि इसके द्वारा कठोर से कठोर दिल के इंसान को भी अपनी इच्छा के अनुरूप वश में किया जा सकता है। तिलक के सम्मोहन में वह शक्ति है, जिससे रूठा हुआ व्यक्ति भी अपनी सारी नाराजगी और शिकायतों को भूलकर नए सिरे से सकारात्मक भावना के साथ जुड़ जाता है। यह कहें कि तिलक में सामने वाले व्यक्ति के मन को मोहित करने की अद्भुत क्षमता होती है।

तिलक से वशीकरण के उपाय को जादू या मंत्र-तंत्र से अभिमंत्रित टोना-टोटका कहना सही नहीं होगा। इसमें संपूर्ण वैज्ञानिकता है और इससे तिलकधारी की प्रबुद्धता उभरकर सामने आ जाती है। आध्यात्म के नजरिए से मस्तिष्क के ठीक बीचो-बीच ‘आज्ञा चक्र’ बना हुआ है, जबकि विज्ञान के अनुसार दिमाग में सेराटोनिक और बीटा एंडेर्फिन रसायन का होने वाला संतुलित स्राव ही मन को उत्साहित कर सकारात्मक बनाता है। मन के विज्ञान को प्रभावित करने वाले तिलक उपायोग के प्रयोग विधि काफी सरल है।

वशीकरण तिलक बनाने के लिए अष्टगंध, हल्दी के अतिरिक्त तिलक किए जाने वाले दूसरे पदार्थों मंे रोली, सिंदूर आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इन सामग्रियों को पूजा स्थल पर रखकर विधिवत धूप और दीप दिखाए जाते हैं। पूजन के लिए अपने इष्टदेव का ध्यान किया जाता है। ध्यान के समय उपयुक्त मंत्र का जाप किया जाता है। इस तरह से तिलक अभिमंत्रित हो जाता है, जिसे लगाने के समय संबंधित उपायों का मंत्र-जाप करना आवश्यक होता है। वशीकरण तिलकों में स्त्री या पुरुष वशीकरण और सर्वजन वशीकरण तिलक मुख्य हैं। इससे न केवल ध्यान केंद्रीत करने में मदद मिलती है, बल्कि दिमागी व आंतरिक शक्ति बढ़ती है, बल मिलता है और नकारात्मक ऊर्जा बचना संभव होता है।

तिलक लगाने के मंत्र हैंः-

केशवानन्नत गोविंद बाराह पुरुषोत्तम।

पुण्यं यशस्यमायुष्मं तिलकं मे प्रसीदतु।।

कांति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्।

ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्।।

रोली, तुलसी के बीज यानि उसके सूखे मंजर से निकले दाने को पीसकर बनाए गए बुरादे और काली हल्दी को आंवले के रस के साथ मिलाकर तिलक लगाने पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे एक सम्मोहक व्यक्तित्व का उभार होता है। गोलाकार या लंबे रूप में लागाए गए इस तिलक से विवाह में आने वाली बाधा दूर हो सकती है या फिर रूठे प्रिय को मनाने या आपसी घरेलू विवाद को लेकर तनावग्रस्त दंपति के लिए रामवाण साबित हो सकता है। चाहे कितना भी बड़ा दुश्मन क्यों न हो वह  इसके प्रभाव मे आकर अपनी दुश्मनी भूल जाता है।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Collection of Vashikaran Mantras | Works fast in love back solution

mohini mantra in hindi